7/14/08

प्यासा

आज फ़िर बादलों ने पर्वतों पे डेरा डाला है
शायद ये मिलन दोनों का फ़िर से सुनहरी होगा
थामे ही रखना उनको यूँ ना बिछड़ने देना
बारिशों की आस मे प्यासा ही ये अभागा है.

No comments: